Vikas Divyakirti : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय (जन्म, परिवार, शिक्षा, करियर)

Dr. Vikas Divyakirti : नमस्कार दोस्तों, आज के लेख में हम जानने वाले है, दृष्टि आईएएस कोचिंग के फाउंडर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय के बारें में, आज के समय में वह देश के सबसे लोकप्रिय टीचर्स में से एक हैं। इसी लोकप्रियता के कारण उनके चाहने वाले डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के निजी जीवन, शिक्षा, करियर, उनकी आईएएस रैंक अटेम्पट्स व उन्होंने दृष्टि आईएएस कोचिंग की शुरुआत कैसे की और उनसे जुड़े हर एक सवाल के बारें में जानना चाहते है।

तो आइए दोस्तों जानते है डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय हिंदी में आज हम उनसे जुड़े सारे जवाब देने का प्रयास करेंगे इसलिए आज का हमारा लेख शुरू से लेकर अंत तक जरूर पढ़ें।

Vikas Divyakirti Biography In Hindi

Dr. Vikas Divyakirti Biography | विकास दिव्यकीर्ति का जीवन परिचय

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का जन्म 26 दिसंबर 1973 को भारत के हरियाणा राज्य के भिवानी शहर में हुआ था। उनका परिवार मूल रूप से पंजाब राज्य से था। शुरु में दिव्यकीर्ति का परिवार एक मध्यम वर्गीय परिवार था। वह सर्वण वर्ग से थे।

विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी शुरुआती पढ़ाई अपने भाइयों के हरियाणा के भिवानी शहर के एक स्कूल से की थी। वहीं इसी विद्यालय में इनकी मां एक हिंदी के अध्यापिका के रूप में कार्यरत थी। दिव्यकीर्ति 12th क्लास की पढ़ाई के बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली चले गए।

डॉ विकास दिव्यकीर्ति Wikipedia
पूरा नामडॉ विकास दिव्यकीर्ति
जन्मदिनांक26 दिसंबर 1973
विकास दिव्यकीर्ति आयु47 साल (2022)
जन्मस्थानहरियाणा, भारत
गृहनगरहरियाणा
स्कूल का नामSaraswati Shishu Mandir, भिवानी हरियाणा
कॉलेजदिल्ली विश्वविद्यालय
राशि – चक्र चिन्हमकर राशि
धर्महिंदू धर्म
राष्ट्रीयताभारतीय

डॉ विकास दिव्यकीर्ति का परिवार

Dr Vikas Divyakirti Family – डॉ. विकास दिव्यकीर्ति सर के परिवार के बारे इंटरनेट पर कुछ ज्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है। लेकिन उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि उनके पिताजी हरियाणा राज्य के महर्षि दयानंद सरस्वती के एक कॉलेज में हिंदी पढ़ाते थे। वह बीजेपी, आरएसएस व आर्य समाज को मानते थे।

Vikas Divyakirti Family Photo
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अपने माता पिता के साथ

वह उनकी मां हरियाणा के भिवानी शहर के एक स्कूल की हिंदी की अध्यापिका थी। उनका निधन 12 नवंबर 2018 में हुआ था। डॉ.विकास दिव्यकीर्ति तीन भाई हैं जिनमें सबसे छोटे विकास दिव्यकीर्ति ही है।

  • विकास दिव्यकीर्ति के बड़े भाई वर्तमान में अमेरिका में है, वह एक सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग है।
  • डॉ. विकास दिव्यकीर्ति के दूसरे भाई CBI में है, वह डीआईजी रैंक पर है, वह भी एक Cvil Servant हैं।

आप नीचे एक तस्वीर देख सकते हैं, जिसमें विकास दिव्यकीर्ति अपने भाइयों और पिताजी के साथ नजर आ रहे है।

Vikas divyakriti brothers photo
डॉ विकास दिव्यकृर्ति अपने भाइयों ओर पिताजी के साथ

यह तीनों भाई उसी स्कूल में पढ़ते थे, जिनमें इनकी मां पढ़ाया करती थी। इस प्रकार उनके माता-पिता का दिल्ली यूनिवर्सिटी से कोई लेना-देना नहीं था।

विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि उनके पिताजी चाहते थे, कि वह एक अच्छे राजनेता बने। उनकी प्रबल इच्छा यहीं थी, कि उनके परिवार में से कोई एक राजनीति में अपना करियर बनाएं।

Vikas Divyakirti Wife Name

डॉ विकास दिव्यकीर्ति व डॉ तरुना वर्मा 26 मई 1997 को शादी के बंधन में बंधे थे। साल 2022 में उनकी शादी को 25 साल पूरे हो गए है, वर्तमान समय में डॉ. तरुना वर्मा दृष्टि कोचिंग संस्थान की ‘मैनेजिंग डायरेक्टर’ है।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति व तरुना वर्मा का एक बेटा है, जिसका नाम सात्विक दिव्यकीर्ति है। वह वर्तमान में दशवीं क्लास की पढ़ाई कर रहा है। उनका कहना है कि उनका बेटा शेर और शायरी में काफी रूचि रखता हैं।

Satvik divyakariti
डॉ विकास दिव्यकीर्ति अपने माता-पिता, पत्नी व बेटे के साथ

Dr.Vikas Divyakirti Education | डॉ विकास दिव्यकीर्ति शिक्षा

Dr. Vikas Divyakirti School Life : विकास दिव्यकीर्ति का कहना है कि वह शुरुआती स्कूली पढ़ाई में वह एक औसत दर्जा के छात्र रहे है लेकिन उस समय उनकी राजनीति में अच्छी खासी रूचि थी। क्योंकि वह उनके स्कूल होने वाले राजनीतिक कार्यक्रम व डिबेट मैं वह बढ़-चढ़कर भाग लेते थे।

उनका कहना है की उनके स्कूली समय में उनके मैथ्स सब्जेक्ट में 100 में से नंबर 100 नंबर आते थे। लेकिन वह इंग्लिश में काफी कमजोर थे। लेकिन अब उनको रोचक बात यह लगती की उन्होंने 10वीं कक्षा में इंग्लिश में सबसे ज्यादा अंक प्राप्त किए थे, उन्हें इंग्लिश में 77 और हिंदी में 72 अंक हासिल किए थे।

दसवीं के बाद उन्होंने 11 और 12 कक्षा इंग्लिश मीडियम से की थी, वही बारहवीं की पढ़ाई के बाद वह राजनेता बनने का सपना लेकर दिल्ली आए। उनके पिता की भी यही इच्छा थी कि वह दिल्ली यूनिवर्सिटी में ABVP ज्वाइन करें और राजनीति में कुछ बड़ा करें।

विकास दिव्यकीर्ति करीब 16 से 17 साल की उम्र में दिल्ली आए थे, वह दिल्ली के जाकिर हुसैन कॉलेज में एडमिशन लिया था। इसका कारण उन्होंने बताया कि उनका एक दोस्त इसी कॉलेज में पढ़ता था। जिनका परिवार उन्हीं के शहर हरियाणा के भिवानी में रहता था। लेकिन इस कॉलेज के में एडमिशन के बाद उनकी ABVP से राजनीति में आगे बढ़ने की संभावना ना के बराबर हो गई इसका कारण यह था कि उस समय उस कॉलेज में ABVP व NSUI जैसी कोई पार्टियां नहीं थी। यह बात 1990 की थी।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति जाकिर हुसैन कॉलेज, दिल्ली

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अपने कॉलेज की बातें बताते हैं, कि वह उस समय आरक्षण विरोधी आंदोलन में शामिल हुए, उन्हें उस समय एससी एसटी ओबीसी के बारे में कुछ नहीं पता था, उन्होंने देखा कि उनके ग्रुप के अधिकांशतः छात्र इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं तो वह भी इस आंदोलन के लिए सड़कों पर उतर गये।

आरक्षण विरोधी आंदोलन में धरना प्रदर्शन तोड़फोड़ आगजनी बड़ी मात्रा में हुई थी, उनका कहना है कि यह सब उन्होंने तो नहीं किया लेकिन वह इस आंदोलन में काफी सक्रिय रहे। कॉलेज लाइफ में उनको पुलिस की 2 से 3 बार मार भी झेलनी पड़ी थी। आरक्षण विरोधी आंदोलन में उनका एक नारा था कि अंदर की यह बात है पुलिस हमारे साथ है।

Dr. Vikas Divyakirti Collage 1st Year: डॉक्टर विकास दिव्यकीर्ति ने बताया की फर्स्ट ईयर खत्म होते होते उनके परिवार पर ऐसा संकट आया की उनका समृद्ध परिवार भी सड़क पर आ गया। उन्होंने इस बारे में कुछ ज्यादा नही बताया लेकिन यह ऐसे संकट थे की उनके परिवार का जिंदा रहना पर भी सवाल थे।

विकास दिव्यकीर्ति ने कॉलेज 1st Year में 54.5 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे।

विकास दिव्यकीर्ति को फर्स्ट ईयर खत्म होने के बाद नौकरी करनी पड़ी, उस समय उनकी उम्र 17 ½ साल थी, उन्होंने एक सेल्समैन की नौकरी की जिसमें वह केलकुलेटर बेचा करते थे। उनके साथ उनका बड़ा भाई भी था वहीं उनका बीच वाला भाई उस वक्त इंजीनियरिंग की पढ़ाई चंडीगढ़ से कर रहा था।

दिव्यकीर्ति का कहना है की उस समय वह डिबेट से भी अच्छे खासे पैसे कमा लेते थे उस दौरान दिल्ली यूनिवर्सिटी में 5 अच्छी डिबेट के लिए 1000 रुपए प्राइज के तौर पर मिलते थे। वह साल भर में लगभग 40 से 50 डिबेट जीतकर करीब 20 से 25 हजार रुपए कमा लेते थे। उनका कहना है कि वह अपनी उधारी के पैसे अधिकांशत डिबेट जीतकर ही चुकाते थे।

जब वह डिबेट में सफल होने लगे तो उन्होंने सेल्समैन की नौकरी छोड़ दी, इसके बाद उन्होंने पहले प्रिंटिंग का काम सीखा, फिर एक प्रिंटिंग कंपनी में काम किया और फिर अपने बड़े भाई के साथ मिलकर एक छोटी सी प्रिंटिंग कंपनी शुरू की। जो की सफल रही थी। उन्होंने बताया कि यह सब उनके ग्रेजुएशन के दौरान चल रहा था।

डॉ विकास दिव्यकीर्ति : जाकिर हुसैन कॉलेज 1990-1993

कॉलेज के 3rd ईयर तक उनके घर की स्थिति भी ठीक हो गई थी। मां को नौकरी मिल गई। ओर पिताजी की भी पुनः नौकरी लग गई थी। वह उन्होंने भी इस वक्त तक अपने कॉलेज में अच्छी खासी प्रसिद्धि पा ली थी, उस वक्त वह अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने की स्थिति में थे

विकास दिव्यकीर्ति ने अपनी पॉपुलरिटी का राज यह बताया कि वह अपनी कॉलेज क्लास रूम को छोड़कर बाकी सब जगह सक्रिय रहते थे। वह अपने कॉलेज मैं होने वाले वाद-विवाद कार्यक्रमों में हिस्सा लेते व मंचों का संचालन करते रहते थे।

उन्होंने यह भी बताया कि उस दौरान कॉलेज की राजनीति में हिंदू मुस्लिम का थोड़ा भाव रहता था लेकिन उनकी छवि ऐसी थी जैसे कि अटल बिहारी वाजपेई की उदारदक्षिण पंथी इसलिए उनके अच्छे खासे मुस्लिम दोस्त भी थे।

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लेकिन उस समय कुछ ऐसा हुआ कि उन्हें चुनाव नहीं लड़ने के निर्देश दिए गए। इसमें उनकी जीवन का खतरा बताया गया, तो उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

इलेक्शन बाद यह बात सच भी साबित हुई की जो चुनाव लड़े उन्हें बाद में चाकू से काफी मारा गया लेकिन वह जिंदा बच गया। वह यह भी बताते कि उनके 3 से 4 दोस्त जिन्होंने चुनाव लड़े व इलेक्शन जीते उनकी मृत्यु हो चुकी है ओर उनकी मौत कोई साधारण मृत्यु नहीं थी।

लेकिन यह सीधे कहना कि उनकी मृत्यु इलेक्शन की वजह से हुई है, यह कहना मुश्किल है क्योंकि वह इलेक्शन के काफी समय बाद मारे गए इनमे 2 दोस्तो की हत्या सरेआम हुई थी। एक को बस में चाकू मार कर फेंका गया, वह दूसरे को दिल्ली के भजनपुरा जगह पर गोली मारकर हत्या की गई।

Dr. Vikas Divyakirti Graduation के बाद

Dr. Vikas Divyakirti MA & J.R.F : ग्रेजुएशन के बाद डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अपने 4 दोस्तों के साथ दिल्ली के पांडव नगर में रहकर तैयारी करने लगे थे। उन्होंने हिस्ट्री छोड़कर एम.ए हिंदी साहित्य से किया। वह उनका एम.ए फाइनल में JRF भी हो गया था। इससे उन्हें महीने के 2500 रुपए मिलने लगे थे।
इस तरह डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने 16 ½ की उम्र कॉलेज में एडमिशन लिए 19 ½ में ग्रुजुएशन पूरा किया ओर 21½ की उम्र में M.A / जे.आर.एफ किया !

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने M.Phil व PhD की पढ़ाई की वह समाजशास्त्र व जन-संचार विषयों में M.A. किया तथा law की पढ़ाई करते हुए LLB किया। वे हिन्दी साहित्य से यू. जी. सी. नेट / जे.आर.एफ. तथा समाजशास्त्र से नेट की परीक्षा पास की थी।

अनुवाद कार्य में भी विकास दिव्यकीर्ति की काफी रुचि रही है। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय तथा भारतीय विद्या भवन दोनों संस्थाओं से अंग्रेज़ी-हिन्दी अनुवाद में P.G. Diploma किया है।Philosophy, Psychology, Cinema Studies, Social Issues & Political Science (विशेषतः भारतीय संविधान में) उनके पसंदीदा अन्य विषय रहे हैं।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति आईएएस रैंक

Vikas Divyakirti IAS Renk And Attemps : डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने आईएएस का पहला अटेंप्स 22 साल उम्र में दिया, उस वक्त वह एम.ए. कर रहे थे। उन्होंने उस बार आईएएस के लिए 2 फॉर्म भरें, पहला हिस्ट्री से वह दूसरा सोशियोलॉजी से…!

इन सब के बीच डॉ विकास दिव्यकीर्ति का डॉ तरुना वर्मा के साथ अफेयर शुरू हो चुका था, उन्होंने आईएएस प्रीलिम्स पास किया, मैंस पास किया फिर इंटरव्यू हुआ वह भी बहुत अच्छा गया और फिर IAS में उनका फाइनल सलेक्शन भी हो गया।

Vikas Divyakirti wife photo
डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ओर डॉ. तरुना वर्मा की एक पुरानी तस्वीर

Dr Vikas Divyakirti IAS Renk / डॉ विकास दिव्यकीर्ति आईएएस रैंक : 4 जून 1998 को जारी आईएएस परिणाम में डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने 384वीं रैंक प्राप्त कि थी। उनके रोल नंबर 97484 थे।

  • विकास दिव्यकीर्ति अपने आईएस के दूसरे अटेंप्स में मेंस पास नहीं कर पाए। उन्होंने सोशलॉजी चुना, इसमें उन्हें कम अंक प्राप्त हुए।
  • डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपने आईएएस के तीसरे अटेंप्स में Philosophy विषय चुना जिसमें वह मैंस में पास हुए लेकिन उनका फाइनल सलेक्शन नही हो पाया।

1 जून 1999 को उनकी जोइनिंग आ चुकी थी लेकिन उन्होंने उस दिन ज्वाइन नहीं किया। ओर उन्होंने अपने घरवालों के कहने पर अगले दिन ज्वाइन किया था।

उन्होंने करीब 6 महीने तक भारत सरकार के गृह मंत्रालय में कार्य किया। उसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया ओर शिक्षण के क्षेत्र में उतर गए….!

  • डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने अपना चौथा अटेंप्स साल 2003 दिया था। उन्होंने इस बार अपना प्रीलिम्स मुंबई से दिया ओर मैंस बैंगलोर में लिखा था लेकिन इस बार भी विकास दिव्यकीर्ति का फाइनल सलेक्शन नही हो पाया। उनको इस बार इंटरव्यू में 204 नंबर प्राप्त हुए थे।

Dr. Vikas Divyakirti द्वारा ‘Drishti IAS’ कोचिंग संस्थान की शुरुआत

डॉ विकास दिव्यकीर्ति ने बताया कि उन्होंने अपने दोस्त के कहने पर पहली बार हिंदी साहित्य पढ़ाया था। उन्होंने 12 छात्रों को पढ़ाया वह इस समय फीस प्रत्येक छात्र से 2000 रुपए ली थी।

अपनी आईएएस की नौकरी के इस्तीफे के उनका रेसिग्नेशन /रिलीविंग लेटर’ आने में 18 से 20 महीने लगे थे और इसी दौरन उन्होंने दृष्टि कोचिंग संस्थान की स्थापना की थी।

दृष्टि कोचिंग संस्थान की स्थापना नवंबर 1999 में डॉ. विकास दिव्यकीर्ति तथा डॉ. तरुणा वर्मा द्वारा की गई थी। तब से लेकर आज तक ‘दृष्टि कोचिंग संस्थान’ सिविल सेवा अभ्यर्थियों के बीच एक लोकप्रिय एवं उपयोगी संस्थान रहा है।

बताया जाता हैं की अभी तक ‘दृष्टि कोचिंग संस्थान’ से जुड़े एक हजार से भी ज्यादा अभ्यर्थियों ने केंद्रीय या राज्यस्तरीय सिविल सेवा परीक्षाओं में सफलता हासिल की है।

दृष्टि द विजन – डॉ. विकास दिव्यकीर्ति

वर्तमान में Drishti कई उद्यमों का समूह है जिसका संबंध शिक्षा के क्षेत्र से है इसका सबसे प्रसिद्ध उद्यम ‘Drishti The Vision’ नामक संस्थान है जो की Civil Services Exam की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को मार्गदर्शन उपलब्ध कराता है।

‘Drishti Publications’ इसका दूसरा प्रमुख उद्यम है जिसके द्वारा हिंदी व अंग्रेज़ी में ‘Drishti Current Affairs Today’ नाम की मासिक पत्रिका व Civil Services Exam में उपयोगी पुस्तकों का प्रकाशन किया जाता है।

‘Drishti Media’ यह दृष्टि कोचिंग संस्थान का एक उभरता हुआ Platform है, जिसके माध्यम से Civil Services Exam की तैयारी के लिये Audio Visual format में नये – नये शैक्षणिक प्रयोग किये जा रहे हैं।

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डॉ विकास दिव्यकीर्ति के बारे में कुछ महत्वपूर्ण सवाल जवाब

सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति कौन है ?

जवाब : दृष्टि कोचिंग संस्थान संस्थापक | IAS अध्यापक | लेखक |
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की उम्र क्या है ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की जन्म तारीख 26 दिसंबर 1973 है उनकी वर्तमान उम्र 49 साल है।
सवाल : डॉ विकास दिव्यकीर्ति की Wife का क्या नाम है ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की पत्नी का नाम डॉ तरुण वर्मा है व उनकी शादी 26 मई 1997 को हुई थी।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति आईएएस रैंक क्या है व उन्होंने कितने यूपीएससी के कितने अटेंप्स दिए थे ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने अपने यूपीएससी के पहले प्रयास में सफलता प्राप्त की थी 4 जून 1998 को यूपीएससी के परिणाम में डॉ. विकास दिव्यकीर्ति को 384 वीं रैंक प्राप्त हुई थी।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने यूपीएससी के कुल 4 अटेंप्स दिए थे लेकिन रोचक बात यह रही कि उन्हें बाकी 3 यूपीएससी अटैंप्स में उनका फाइनल सलेक्शन नही हुआ।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने दृष्टि कोचिंग संस्थान की स्थापना कब की !

जवाब : विकास दिव्यकीर्ति ने नवंबर 1999 में दृष्टि कोचिंग संस्थान स्थपाना की थी।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की पसंदीदा चीजें क्या हैं ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति को ड्राइव करना, यात्रा करना व किताबें पढ़ना पसंद है उन्हें Sky Diving भी काफी पसंद है

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अमेरिका में स्काई डाइव करते डॉ विकास दिव्यकीर्ति

सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति कि पसंदीदा फिल्में कौन कौन सी है ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति की पसंदीदा फिल्में लंच बॉक्स | एकलव्य | गुलाल | मशान जैसी फिल्में रही हैं।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का एक सपना फिल्म बनाने का भी रहा है उनका कहना है कि यदि उन्हें कभी मिला तो वह थ्री इडियट या पंचायत जैसे फिल्म जरूर बनयाएंगे ।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने आरक्षण के बारे में क्या है ?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति आरक्षण के समर्थन में हैं वह जेंडर बेस व 3rd जेंडर आरक्षण का भी समर्थन करते है व इसमें कुछ बदलाव की भी मांग करते है।

डॉ. विकास दिव्यकीर्ति आरक्षण पर यूट्यूब पर 2 घंटे 27 मिनट का एक वीडियो किया है। जिन्होंने आरक्षण के बारे में विस्तार से समझाया है। ओर वह आरक्षण पर अपना दूसरा वीडियो बहुत जल्द अपलोड करने वाले है।

आरक्षण पर डॉ विकास दिव्यकीर्ति का वीडियो देखने के लिए आगे दिए गए लिंक पर क्लिक करें – क्लिक करें
सवाल: डॉ विकास दिव्यकीर्ति का धर्म को लेकर क्या विचार है?

जवाब : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति का कहना है की उनके पिताजी आर्य समाज को मानते है और उनकी पत्नी सनातन धर्म को बहुत मानती है। लेकिन उनकी धर्म में आस्था शुरुआत से ही कम रही है। लेकिन वह किसी धर्म का अनादर कभी नही करते है।

दिव्यकीर्ति का मानना है की अभी धर्म समाज के लिए बहुत जरूरी है ईश्वर है या नहीं यह कोई नहीं जानता मैं भी नहीं जानता और उनके नहीं जानने से यह तय नहीं होता कि ईश्वर नही है इससे नास्तिकता उतनी ही बड़ी मूर्खता है जितना कि यह दावा कि मैं ईश्वर जनता हूं।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति राष्ट्रवादी के बारें में क्या विचार हैं ?

जवाब : विकास दिव्यकीर्ति कहते है की वह राष्ट्रवादी व्यक्ति है लेकिन अंतरराष्ट्रवाद के विरोध में नहीं हैं वह कहते हैं कि वह कभी नही चाहते की पाकिस्तान बर्बाद हो जाये वो वह चाहते है की भारत आबाद रहे, पाकिस्तान भी आबाद रहे और चीन भी आबाद रहे।

दिव्यकीर्ति कहते हैं कि सिर्फ इस संयोग से की कोई व्यक्ति वहां पैदा हुआ इसलिए उसे मर जाना चाहिए ऐसा राष्ट्रवाद उनका नहीं है। राष्ट्र के संबंध सबसे अच्छे होने चाहिए क्यों हम किसी के लिए खराब कामना करें।

अगर किसी देश कि सेना गड़बड़ करे तों हमारी सेना उनसे लड़ेगी हम अपनी सेना के साथ हैं लेकिन हम ऐसे कामनाएं क्यों करें की सारे पाकिस्तानी मर जाएं।
सवाल : डॉ. विकास दिव्यकीर्ति ने यूपीएससी में असफल होने वाले छात्रों के बारे में क्या कहा ?

जवाब: इस बात पर डॉ. विकास दिव्यकीर्ति कहते है की हमारे देश में अवसर बहुत कम ओर आवेदक बहुत ज्यादा यह बात हर फील्ड में है चाहे राजनीति, फिल्म उद्योग, क्रिकेट हो या यूपीएससी।

जैसे की क्रिकेट का सपना तो लाखों लोग देखते हैं, लेकिन इंडियन टीम में या आईपीएल में बहुत कम लोग पहुंच पाते हैं इसलिए आप तैयारी क्रिकेट की करें या फिल्मों की करें या यूपीएससी की करें। तैयारी से पहले आपको यह तय जरूर कर लेना चाहिए की अगर सफल ना हो तो क्या होगा।

इसलिए डॉ. विकास दिव्यकीर्ति अपनी क्लास में एक बात जरूर बताते है की सक्सेस की कोई गारंटी नहीं हैं इतनी गारंटी है कि एक बेहतर इंसान बन जाओगे ओर जिंदगी में कुछ अच्छा कर लोगे अगर मेहनत की तो।

वह यह कभी चाहते है की कोई यूपीएससी की इस भाव से तैयारी करें की अगर नही हो तो मर जाऊ इससे अच्छा है कि वह तैयारी ही ना करें ।

इस बात पर वह एक शेर भी सुनाते है : क्यों डरें जिंदगी से क्या होगा, कुछ नही तो तुजर्बा होगा।

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